ज़्यादातर लोग कभी कहते ही नहीं कि उन्हें क्या चाहिए। ऐसा इसलिए नहीं है कि हम चाहते नहीं हैं। हम बेहद शिद्दत से और हर पल कुछ न कुछ चाहते हैं। यह ख्वाहिश नींद आने से ठीक पहले के लम्हों में या घर लौटते वक्त कार में खोए-खोए रहने पर जागती है। हम अपने परिवार के साथ ज़्यादा वक्त बिताना चाहते हैं, social anxiety से उबरना चाहते हैं, सेहतमंद खाना खाना चाहते हैं, कोई बेकरी खोलना चाहते हैं, एक app बनाना चाहते हैं, या फिर भागदौड़ भरी ज़िंदगी में सुकून के कुछ और पल तलाशना चाहते हैं। लेकिन हमें शायद ही कभी इन सपनों को ज़ुबान पर लाने का मौका मिलता है, और उनके सच होने की बात तो और भी दूर की कौड़ी है।
जब हम अपने सपनों को नाम नहीं दे पाते, तो अक्सर उन तक पहुँच भी नहीं पाते। यह दुनिया फॉर्म्स, gatekeepers, शेड्यूल और रुकावटों का एक भूलभुलैया है, और ज़्यादातर सपने किसी को बताए जाने से बहुत पहले ही छोटी-छोटी हज़ारों चुनौतियों से टूटकर बिखर जाते हैं। वे "समझ नहीं आ रहा कहाँ से शुरू करें" वाली उलझन में और उन फोन कॉल्स में दम तोड़ देते हैं जो कभी की ही नहीं गईं।
हर अधूरी ख्वाहिश इंसानी क्षमता की एक खामोश त्रासदी है।
अब ज़रा सोचिए कि धरती पर हर इंसान के पास उसके अपने दिमाग के अलावा एक दूसरा दिमाग हो। एक ऐसा general manager जिसका पूरा काम यही हो कि वह समझे आपको क्या चाहिए और यह पक्का करे कि वो आपको मिले। कोई ऐसा, जो आपके अधूरे वाक्य — "मुझे लगता है मैं इससे कहीं ज़्यादा कर सकता हूँ" — को सुने और बाकी की कड़ियाँ जोड़ने में आपकी मदद करे। शायद यह चिराग का जिन्न न हो, लेकिन कोई ऐसा ज़रूर हो सकता है जो कहे, "यही वो चीज़ है जिसका सपना तुम पूरी ज़िंदगी देखते आए हो। चलो इसे हासिल करते हैं। तरीका ये है।" और फिर एक plan बनाए। email भेजे। फोन कॉल करे। funding जुटाए। आपको schedule पर चलने में मदद करे। रास्ते की रुकावटें हटाए और हर उस समस्या को सुलझाए जो सुलझाई जा सकती है, ताकि आखिर में सिर्फ इंसानी हिस्सा बचे — चाहना और सपने देखना।
और सबसे अच्छी बात यह है: हमें खुद नहीं पता कि लोग क्या चाहेंगे। अब तक की दुनिया उन गिने-चुने दीवानों ने गढ़ी है जिन्होंने किसी तरह अपनी ख्वाहिशों को हकीकत में बदलने का रास्ता खोज लिया। लेकिन हमने अभी तक इंसानियत को उस रूप में नहीं देखा है जब हर एक इंसान की पूरी ताकत और पहलकदमी दांव पर लगी हो। आठ अरब लोग, जिन्हें अपना सपना सच करने की शुरुआत के लिए बस उसे लिख लेने की ज़रूरत है।
इसीलिए हमने Muse बनाया, ताकि लोगों को वो दुनिया बनाने में मदद मिल सके जो वे चाहते हैं।
चाहत के नाम। सपनों के नाम। हर एक इंसान के नाम।





