नए ऑनचेन फाइनेंशियल प्रिमिटिव्स और एजेंट्स की असीमित अटेंशन का मेल उपभोक्ताओं के लिए अभूतपूर्व वैल्यू क्रिएशन का वादा करता है। नियंत्रण की यह जंग शुरू हो चुकी है।
2030 तक ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की सालाना रेवेन्यू दांव पर लगने वाली है, जो 2035 तक बढ़कर सालाना 4 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। हर बड़ा बैंक, ब्रोकर, पेमेंट्स फर्म और डिजिटल एसेट्स कंपनी पैसे और वैल्यू को लेकर हमारे समय की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाइयों में से एक में अपनी हिस्सेदारी हासिल करने की दौड़ में है।
इस पर जितना ध्यान दिया जा रहा है, उससे कहीं ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
यह उन चार तत्वों पर बन रहा है जो अब तक एक साथ मौजूद नहीं थे, जिन्हें मैंने इस साल मई में CoinDesk में "The agentic CFO in your pocket" शीर्षक वाले एक OpEd में विस्तार से बताया था। स्टेबलकॉइन्स जो हमेशा चालू रहने वाले डिजिटल कैश की तरह काम करते हैं। टोकनाइज्ड रियल-वर्ल्ड एसेट्स जिनमें फंड्स, स्टॉक्स, कमोडिटीज और बॉन्ड्स शामिल हैं। डीसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (DeFi) एक प्रोग्रामेबल ऑनचेन फाइनेंस लेयर के रूप में, जहां इन एसेट्स को काम में लगाया जाता है। और AI एजेंट्स एक ऑटोमेशन लेयर के रूप में, ताकि हर निवेशक की फाइनेंशियल लाइफ को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके।
यह संगम ही इकोनॉमिक बिग बैंग है। इनमें से हर ताकत अपने आप में बहुत शक्तिशाली है। लेकिन जब ये एक साथ आती हैं, तो फाइनेंस अलग-अलग, आपस में न जुड़े प्रोडक्ट्स के समूह की तरह काम करना बंद कर देता है। यह एक नया एजेंटिक फाइनेंशियल यूनिवर्स बन जाता है जो लगातार खोज सकता है, फैसले ले सकता है और कार्रवाई कर सकता है — वह भी पूरी तरह निवेशकों की ओर से। आने वाले इस बदलाव के असर को मापने के लिए, मेरी टीम ने उभरते हुए एजेंटिक फाइनेंशियल यूनिवर्स का एक मॉडल तैयार किया है। यह 2035 तक ग्लोबल फाइनेंशियल इंडस्ट्री की ग्रोथ का अनुमान लगाता है और यह जांचता है कि फी कंप्रेशन, नए खिलाड़ियों, बदलती मार्केट शेयर और वैल्यू के नए एजेंट्स व रेल में शिफ्ट होने से दस प्रमुख वर्टिकल्स कैसे बदल सकते हैं।
हमारा मॉडल पूरी तरह एजेंटिक फाइनेंशियल एक्टिविटी पर केंद्रित है, जो AI क्रांति का अगला चरण है। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े ऑटोमेशन की एक दशक पुरानी नींव पर खड़ा है, जिसका अनुमान है कि आज यह फाइनेंशियल इंडस्ट्री की लगभग 3 से 5 प्रतिशत यूजर एक्टिविटी को चलाता है। यह आर्टिकल उस भविष्य की वैल्यू पर केंद्रित है, जो संस्थानों और रिटेल निवेशकों दोनों के लिए फाइनेंशियल इंडस्ट्री को मैनेज करने में मदद करने वाले एजेंट्स द्वारा बनाई जाएगी।
अटेंशन डेफिसिट इकोनॉमी और हाइपर अटेंटिव एजेंट्स
अटेंशन स्पैन एक ऐसी अनदेखी लेकिन दुर्लभ चीज़ है जो कई फाइनेंशियल नतीजों को तय करती है। हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां अटेंशन की भारी कमी है, खासकर जब बात अपनी फाइनेंशियल लाइफ को मैनेज करने की आती है। अटेंशन के इस खालीपन को अक्सर बिना मांगे आए विज्ञापनों, एल्गोरिद्मिक रिकमेंडेशन्स और सबसे अहम बात, जानकारी छुपाए जाने से भर दिया जाता है, जिसकी वजह से रिटेल निवेशकों को सैकड़ों अरब डॉलर का नुकसान होता है। एजेंट्स इस पूरे समीकरण को बुनियादी तौर पर बदल देते हैं।
इसका मतलब है कि एजेंट्स निवेशकों को काफी बड़ी वैल्यू वापस देंगे। ये आपके फाइनेंशियल प्रोवाइडर्स को बैंकिंग, लेनदेन और उधार लेने के लिए सबसे कम संभव फी देने की होड़ में झोंक देंगे। हमारा अनुमान है कि एजेंट्स की होड़ से घटने वाली फी की वजह से 2030 तक वे सामूहिक रूप से हर साल अतिरिक्त 350 अरब डॉलर बचाएंगे, जो 2035 तक बढ़कर 1.4 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है। दूसरे शब्दों में कहें तो, 2035 तक एजेंट्स ग्लोबल फाइनेंशियल इंडस्ट्री की कुल फी का लगभग एक चौथाई हिस्सा खत्म कर देंगे।
फी कंप्रेशन तो बस शुरुआत है। इसके बाद यही एजेंट्स आपके पैसे को अधिकतम उत्पादक बनाएंगे।

आज, अमेरिकी घरों के पास चेकिंग, सेविंग्स और शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट्स में लगभग 15 ट्रिलियन डॉलर हैं, जिनमें से ज्यादातर पर चल रहे मनी-मार्केट रेट्स का एक छोटा सा हिस्सा ही मिलता है। इससे अमेरिकी रिटेल सेवर्स को हर साल कम से कम 180 अरब डॉलर के ब्याज का नुकसान होता है, जो उन्हें कभी दिखता ही नहीं। चेकिंग अकाउंट में सात बेसिस पॉइंट्स कमाने वाला पैसा मनी मार्केट फंड में 3 से 4 प्रतिशत कमा सकता है। छह महीने की CD मैच्योर होकर वापस ऐसे अकाउंट में आ सकती है जिस पर लगभग कुछ नहीं मिलता, और जब तक किसी को याद न आए, पैसा वहीं पड़ा रहता है। एजेंट कभी नहीं भूलता। एजेंट के पास असीमित अटेंशन और पूरी फाइनेंशियल समझ होती है।
लेकिन एजेंट सिर्फ बेहतर सेविंग्स रेट ढूंढने पर नहीं रुकता। वह समझता है कि हर डॉलर से क्या हासिल करना है। वह आपके शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों के हिसाब से पोर्टफोलियो बनाता है, उसे लगातार मॉनिटर करता है, बाजार और आपकी परिस्थितियां बदलने पर उसे रीबैलेंस करता है, और मौका मिलने पर टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग करता है। एजेंट आपकी देनदारियों पर भी नजर रखेगा। वह आपके मॉर्गेज को मॉनिटर करेगा ताकि यह तय कर सके कि प्रीपेमेंट कब करना है और ब्याज दरें गिरने पर रीफाइनेंसिंग कब फायदेमंद होगी। यह क्रेडिट कार्ड बैलेंस को भी ट्रांसफर करेगा ताकि उधार की लागत कम हो या लॉयल्टी पॉइंट्स अधिकतम मिल सकें।
एजेंट्स हर निवेशक को, चाहे उसके अकाउंट का साइज कुछ भी हो, पहली बार इस नॉलेज के मामले में ऊपर उठने का मौका देते हैं। और यह लोगों की सोच से कहीं ज्यादा मायने रखता है। आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का मतलब सिर्फ बेहतर एसेट्स और मौकों तक पहुंच होना नहीं है। इसके लिए यह जानना जरूरी है कि सही सवाल कौन से पूछने हैं और उन्हें कब पूछना है।
ये कोई अलग-अलग सुधार नहीं हैं। ये एक ही फाइनेंशियल लाइफ के हिस्से हैं, जिसे लगातार देखने या समझने का किसी इंसान के पास समय नहीं है। लेकिन एजेंट्स इसे बदल देते हैं। एजेंट न सोता है और न ही उसका ध्यान भटकता है। उसका अटेंशन स्पैन असीमित होता है और वह उस व्यक्ति के फाइनेंशियल हितों को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहता है जिसकी वह सेवा कर रहा है।
जीत का झंडा हासिल करने की महाजंग
एजेंट्स पर किसका कब्जा होगा और नई वैल्यू कौन बनाएगा व हासिल करेगा, इसकी जंग पहले ही शुरू हो चुकी है। युद्ध का मैदान खचाखच भरा है। इसमें Visa, Mastercard, Stripe, PayPal, Circle, Tether, Robinhood, Coinbase, Binance और कई अन्य नाम शामिल हैं। JPMorgan, Citigroup, BlackRock, BNY, State Street जैसे दुनिया के सबसे बड़े फाइनेंशियल संस्थान और अन्य पुराने खिलाड़ी बारीकी से नजर रख रहे हैं और इस नए फाइनेंशियल सिस्टम के लिए अपनी रणनीतियां बना रहे हैं। उनमें से हर कोई उसी एक झंडे को हासिल करना चाहता है, यानी उस जगह पर कब्जा करना जहां अरबों ग्लोबल ग्राहकों की तरफ से ट्रिलियन एजेंट्स लेनदेन करेंगे।
दांव पिछली हर टेक्नोलॉजी क्रांति जैसा ही लगता है। लेकिन इसका पैमाना पूरी तरह अलग है, क्योंकि यह पैसे के भविष्य को लेकर लड़ी जा रही जंग है। जिसके पास इंफ्रास्ट्रक्चर होगा, उसके पास एजेंट होगा, और इसलिए ग्राहक भी उसी का होगा। जीतने वाला हर लेनदेन पर फी वसूलेगा, एजेंट का हर फैसला देखेगा, और तय करेगा कि एजेंट कौन से प्रोडक्ट्स की सिफारिश कर सकता है और आपका खाली पड़ा कैश किस फंड में ट्रांसफर होगा।
ऑनचेन प्रिमिटिव्स और ओपन रेल भारी वैल्यू खोलेंगे
आपके एसेट्स को अधिकतम उत्पादक बनाने के लिए एजेंट को नए, हमेशा चालू रहने वाले फाइनेंशियल टूल्स की जरूरत होती है। ये स्टेबलकॉइन्स, टोकनाइज्ड रियल-वर्ल्ड एसेट्स और DeFi एग्जीक्यूशन वेन्यूज के जरिए आते हैं, जो प्रोग्रामेबल और हमेशा चालू रहने वाले ब्लॉकचेन रेल का एक सेट शेयर करते हैं। एजेंट को ओनरशिप, कीमतें, कोलैटरल की जरूरतें और लेंडिंग के मौके एक ही माहौल में दिखने चाहिए। उसे बिना कई बिचौलियों के अलग-अलग लेजर्स को मिलाए जाने का इंतजार किए, स्टेबलकॉइन्स ट्रांसफर करने, टोकनाइज्ड एसेट गिरवी रखने, उसके बदले उधार लेने और लेनदेन सेटल करने में सक्षम होना चाहिए। Aave और Morpho जैसी कंपनियां एजेंटिक क्षमताओं के साथ इस तरह की ऑनचेन बॉरोइंग और लेंडिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और एप्लिकेशन लेयर बना रही हैं।
ये ऑनचेन प्रिमिटिव्स टोकनाइज्ड एसेट्स को सुपरपावर देते हैं। टोकनाइज्ड स्टॉक अब ब्रोकरेज अकाउंट में खाली नहीं पड़ा रहेगा। इसे अतिरिक्त आय पैदा करने के लिए उधार पर दिया जाएगा या शॉर्ट-टर्म लोन के लिए कोलैटरल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे निवेशक बिना बेचे लिक्विडिटी हासिल कर सकेगा। टोकनाइज्ड बॉन्ड्स और फंड्स भी उत्पादक कोलैटरल बन जाएंगे। जब डिमांड ज्यादा होगी तो स्टेबलकॉइन्स लेंडिंग मार्केट्स में जा सकते हैं, और जब निवेशक को लिक्विडिटी चाहिए होगी तो वापस कैश में आ सकते हैं। एजेंट इन मार्केट्स में रेट्स, रिस्क और टैक्स के नतीजों पर नजर रख सकता है और तय कर सकता है कि किसी एसेट को कब होल्ड करना है, उधार पर देना है, उसके बदले लोन लेना है या ट्रांसफर करना है।
इन सबके ऑनचेन होने की प्रक्रिया अभी बिल्कुल शुरुआती दौर में है, लेकिन इस नए फाइनेंशियल यूनिवर्स के मानक तेजी से बन रहे हैं। Coinbase ने x402 नाम से मशीन-टू-मशीन स्टेबलकॉइन माइक्रोपेमेंट्स का एक स्टैंडर्ड लिखा और उसे ओपन-सोर्स कर दिया। Base (Coinbase का Ethereum-आधारित नेटवर्क) और Solana सहित ऑनचेन नेटवर्क्स के जरिए एजेंट-टू-एजेंट स्टेबलकॉइन पेमेंट्स में सैकड़ों मिलियन लेनदेन पहले ही सेटल हो चुके हैं। Ethereum का ट्रस्टलेस एजेंट रजिस्ट्री प्रोटोकॉल, ERC-8004, एक वेरिफाएबल आइडेंटिटी फ्रेमवर्क स्थापित करता है जो अलग-अलग संगठनों के एजेंट्स को बिना पहले से द्विपक्षीय भरोसे के लेनदेन करने में सक्षम बनाता है। इससे ऐसी ओपन एजेंट इकोनॉमी बनती है जो किसी एक प्लेटफॉर्म ऑपरेटर के बजाय साझा नियमों से चलती है। दस हफ्तों के भीतर 10,000 से ज्यादा एजेंट्स ने इसका इस्तेमाल करने के लिए रजिस्टर किया।
ये एजेंटिक लेनदेन मुख्य रूप से वहीं होंगे जहां स्टेबलकॉइन्स, टोकनाइज्ड एसेट्स और DeFi लिक्विडिटी केंद्रित हैं, और इनमें से ज्यादातर Ethereum इकोसिस्टम के भीतर हैं। Ethereum ने अप्रैल 2026 में एक दिन में 3.6 मिलियन लेनदेन का मेननेट रिकॉर्ड बनाया और गर्मियों के दौरान नियमित रूप से एक दिन में 2 मिलियन से ज्यादा लेनदेन क्लियर किए, और नेटवर्क में पॉजिटिव बैलेंस वाले 200 मिलियन से ज्यादा ऑनचेन एड्रेस हैं।
आगे क्या होगा
आने वाले दिनों में, मैं कुछ और आर्टिकल्स शेयर करूंगा जो इस नए पैराडाइम को आकार देने वाली ताकतों और उपभोक्ताओं व इंडस्ट्री के प्रतिस्पर्धियों दोनों के लिए दांव पर लगी चीजों की पड़ताल करेंगे।
एक आर्टिकल एजेंटिक फाइनेंशियल इकोनॉमी में पुराने खिलाड़ियों और नए चैलेंजर्स के बीच की जंग का नक्शा तैयार करेगा और आकलन करेगा कि कौन बाजी मारने के लिए तैयार है। दूसरा आर्टिकल उन सिद्धांतों और सुरक्षा उपायों की जांच करेगा जो इस एजेंटिक फाइनेंशियल क्रांति को खुले और निष्पक्ष तरीके से सफल बनाने के लिए जरूरी हैं।





