Ballon d’Or के लिए वोटिंग सबसे मुश्किल उन सालों में नहीं होती जब कोई भी खिलाड़ी काफी शानदार न रहा हो। असली चुनौती तब आती है जब 'शानदार' की परिभाषा तय करना ही एक टेढ़ी खीर बन जाए।
Harry Kane ने क्लब और देश के लिए 73 गोल दागे।
Kylian Mbappe La Liga, Champions League और World Cup — तीनों में टॉप स्कोरर रहे।
Lamine Yamal को La Liga का बेस्ट प्लेयर चुना गया और फिर उन्होंने Spain के साथ वर्ल्ड चैंपियन बनने का कारनामा कर दिखाया।
Rodri आधिकारिक तौर पर उस World Cup के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी थे।
Khvicha Kvaratskhelia को आधिकारिक तौर पर Champions League का बेस्ट प्लेयर माना गया। मौजूदा विजेता Ousmane Dembele ने भी उस टूर्नामेंट में अहम भूमिका निभाई थी।
और आखिर में, 39 साल की उम्र में Lionel Messi ने MLS Cup जीता, उसके MVP बने, और फिर Argentina को एक और World Cup फाइनल तक खींच ले गए — इस दौरान उन्होंने आठ गोल किए और टूर्नामेंट के Silver Ball विजेता रहे।
एक Ballon d’Or। सात बिल्कुल अलग-अलग दलीलें।
इसलिए 2026 का Ballon d’Or किसी एक फुटबॉलर से ज्यादा खुद इस अवॉर्ड की परीक्षा बन गया है। France Football का कहना है कि मापदंड इस क्रम में लागू होते हैं: पहले व्यक्तिगत प्रदर्शन और निर्णायक, प्रभावशाली खेल; फिर सामूहिक प्रदर्शन और ट्रॉफियां; और फिर क्लास व फेयर प्ले। वोटिंग की अवधि 3 August 2025 से शुरू होकर 19 July 2026 को World Cup खत्म होने तक चलेगी।
कागजों पर तो सब सीधा-सादा लगता है, लेकिन जरा इन दलीलों को सुनिए।
कितने गोल काफी होते हैं?
Harry Kane का मामला तो अपने आप ही बन जाता है, उनके आंकड़े देखकर यकीन नहीं होता। पूरे सीजन में Bayern Munich और England के लिए कुल 73 गोल। इनमें से 61 गोल सिर्फ Bayern के लिए।

उन्होंने European Golden Shoe जीता, Bundesliga और DFB-Pokal का डबल दिलाने में मदद की, Champions League में 14 बार गोल किया और फिर World Cup में छह और गोल जोड़े, जहां England तीसरे स्थान पर रहा।
2011-12 में Lionel Messi के 82 गोल करने के बाद से किसी ने एक सीजन में क्लब और देश के लिए इतने गोल नहीं किए थे। अगर वो इसे आसानी से नहीं जीत पाते, तो यह लगभग नाइंसाफी ही लगेगी।
आखिर उन्हें और क्या करना था?
बरसों से, जब भी ट्रॉफियां व्यक्तिगत प्रदर्शन पर भारी पड़ती दिखी हैं, Ballon d’Or की आलोचना हुई है। फिर भी France Football के अपने नियम साफ तौर पर व्यक्तिगत प्रदर्शन को पहला स्थान देते हैं।
अगर इन शब्दों की कोई अहमियत है, तो Kane का यह सीजन बेहद मायने रखता है। इस अंग्रेज खिलाड़ी के खिलाफ जो दलील दी जाती है, वो इस बात पर टिकी है कि वो क्या नहीं कर पाए।
Kane ने Champions League नहीं जीता। England ने World Cup नहीं जीता। Ballon d’Or के इतिहास ने हमें सिखाया है कि 70 गोल कभी-कभी फाइनल की एक यादगार रात के आगे हल्के पड़ जाते हैं।
यह जरूरी नहीं कि यह सही हो, लेकिन अतीत में इस अवॉर्ड का फैसला ऐसे ही होता आया है।
क्या बिना किसी ट्रॉफी के बेहतरीन व्यक्तिगत सीजन टिक सकता है?
अब बात Kylian Mbappe की। वो व्यक्तिगत प्रदर्शन बनाम सामूहिक ट्रॉफियों वाली इस बहस को और भी पेचीदा बना देते हैं।

उन्होंने La Liga में 25 गोल किए। Champions League में सिर्फ 11 मैचों में 15 गोल दागकर टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर बने। फिर World Cup में गए और 10 और गोल ठोक दिए, Golden Boot जीता और इस टूर्नामेंट में अपने करियर के कुल गोल 22 तक पहुंचा दिए।
चाहे जो भी जर्सी पहनी हो, उन्होंने गोल करना नहीं छोड़ा। फिर भी Real Madrid का सीजन बिना किसी बड़ी ट्रॉफी के खत्म हुआ। France World Cup के सेमीफाइनल में Spain से हार गया।
Mbappe ने खुद इस विरोधाभास को सीधे तौर पर स्वीकारा है और कहा है कि Ballon d’Or एक व्यक्तिगत अवॉर्ड है, इसलिए टीम की हार को किसी की व्यक्तिगत प्रतिभा पर हावी नहीं होना चाहिए। सच कहें तो उनकी बात में दम है।
अगर दुनिया का बेहतरीन खिलाड़ी तीन अलग-अलग स्कोरिंग प्रतियोगिताओं में छा जाए और फिर भी इसलिए हार जाए क्योंकि दूसरी टीमों ने ज्यादा ट्रॉफियां जीत लीं, तो एक दिन हमें यह पूछना ही होगा कि क्या Ballon d’Or सच में किसी व्यक्ति को सम्मानित करता भी है?
इस साल Mbappe की दावेदारी दरअसल इस अवॉर्ड के नियमों की ही एक कड़ी परीक्षा है।
ऐसे खिलाड़ी को कैसे मापें जिसका असर आंकड़ों से परे हो?
Lamine Yamal की दलील बिल्कुल अलग है। उन्हें 73 गोल की जरूरत नहीं है। Barcelona ने La Liga का खिताब बरकरार रखा और Lamine को टूर्नामेंट का Player of the Season चुना गया।

फिर Spain ने World Cup जीता, जिसमें वो टूर्नामेंट के सबसे अहम अटैकर्स में से एक थे। मन तो करता है कि यह भी बताएं कि उन्होंने ये सब महज एक टीनेजर रहते हुए किया।
लेकिन इससे कुछ तय नहीं होना चाहिए। उम्र Ballon d’Or का मापदंड नहीं है। यूं ही तो Golden Boy अवॉर्ड बनाया गया है।
Lamine का प्रभाव — डिफेंडरों को छकाते हुए निकलना, साथियों के लिए मौके बनाना और विंग पर बिजली सी फुर्ती भर देना — Kane के 73 गोल या Mbappe की गोल करने की क्षमता के आगे मापना थोड़ा मुश्किल है।
इसका मतलब यह नहीं कि उनके पास आंकड़े नहीं हैं। Barcelona के इस विंगर ने लीग सीजन 16 गोल और 12 असिस्ट के साथ खत्म किया, और चोट के कारण कुछ समय बाहर रहने के बावजूद सभी प्रतियोगिताओं में 24 गोल और 17 असिस्ट के साथ अपना अभियान समाप्त किया।
उनकी दलील यही है कि सबसे बेहतरीन फुटबॉलर का हमेशा सबसे ज्यादा आंकड़े वाला खिलाड़ी होना जरूरी नहीं है।
क्या एक बड़ा महीना बाकी ग्यारह महीनों पर भारी पड़ता है?
Rodri के पास शायद World Cup वाले साल की सबसे पारंपरिक दलील है।

Spain ने टूर्नामेंट जीता। FIFA ने उन्हें बेस्ट प्लेयर चुना। उन्होंने La Roja के सभी आठ मैच खेले, जिसमें टीम ने सिर्फ एक गोल खाया और मिडफील्ड पर उनका कंट्रोल बार-बार झलका।
इस सीजन में किसी भी दावेदार के पास World Cup Golden Ball से बड़ा व्यक्तिगत अवॉर्ड नहीं है।
इससे वोटर्स के सामने एक और समस्या खड़ी हो जाती है। एक टूर्नामेंट की कीमत कितनी है? World Cup फुटबॉल सीजन के सिर्फ कुछ हफ्ते घेरता है, लेकिन इसका वजन ऐसा है जिसकी बराबरी कोई और प्रतियोगिता नहीं कर सकती। हर चार साल में खेले गए सात-आठ मैचों की वजह से कई खिलाड़ियों के पूरे करियर को अलग नजरिए से देखा जाता है। जरा Ferran Torres से पूछिए।
Rodri के पास Kane जैसे आंकड़े नहीं थे। उन्होंने Mbappe की तरह गोल नहीं किए। उन्होंने Lamine जैसी रोमांचक छाप नहीं छोड़ी। Manchester City के साथ उनका क्लब सीजन भी कुछ खास नहीं रहा। उन्होंने बस इतना किया कि एक ऐसे सेंट्रल मिडफील्डर बन गए जिसके इर्द-गिर्द वर्ल्ड चैंपियंस ने अपना पूरा टूर्नामेंट खड़ा किया।
इस 30 वर्षीय खिलाड़ी ने ऐसा पहले भी किया है, लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि दूसरी बार यह ट्रॉफी उठाने के उनके चांस ना के बराबर हैं।
क्या Champions League की रातें अभी भी सबसे बड़ी कसौटी हैं?
PSG के पास भी Ballon d’Or के दो मजबूत दावेदार हैं।

Ousmane Dembele Luis Enrique की टीम के सबसे अहम खिलाड़ियों में से एक बने हुए हैं। उन्होंने Champions League में आठ गोल किए, जिनमें Arsenal के खिलाफ फाइनल में बराबरी वाला पेनल्टी गोल शामिल था, और PSG के लिए नॉकआउट दौर के कुछ सबसे धमाकेदार प्रदर्शन दिए।
हालांकि, अगर हम सिर्फ PSG के सीजन को परखें, तो Khvicha Kvaratskhelia का पलड़ा भारी है।
उन्होंने 16 मैचों में 10 Champions League गोल किए और छह असिस्ट दिए। Bayern के खिलाफ उस शानदार 5-4 सेमीफाइनल जीत में दो गोल दागे, फाइनल में PSG की बराबरी के लिए पेनल्टी हासिल की, और एक ही Champions League सीजन में लगातार सात नॉकआउट मैचों में गोल या असिस्ट करने वाले पहले खिलाड़ी बने। UEFA ने आखिरकार उन्हें टूर्नामेंट का Player of the Season चुना।
Dembele शायद Luis Enrique के PSG का ज्यादा जाना-पहचाना चेहरा और Ballon d’Or की रेस में ज्यादा स्थापित नाम हों। लेकिन इस बार, सीजन पर Khvicha की छाप ज्यादा रही।
इससे Dembele Ballon d’Or की दौड़ से बाहर नहीं होते। लेकिन इससे दोनों के लिए एक अजीब सी मुश्किल खड़ी हो जाती है।
जितने ज्यादा वोटर्स PSG के सीजन को व्यक्तिगत सम्मान के लायक मानेंगे, उतना ही उन वोटों के दो साथियों में बंटने का खतरा बढ़ेगा। कुछ लोग Dembele के रुतबे, उनकी धमाकेदार खेल शैली और Luis Enrique के सिस्टम में उनके व्यापक प्रभाव को तरजीह देंगे। वहीं दूसरे Khvicha के बेहतर Champions League आंकड़ों और UEFA के Player of the Season अवॉर्ड को देखेंगे।
कभी-कभी एक ही टीम के दो मजबूत दावेदार एक-दूसरे की ताकत नहीं बनते। वो एक-दूसरे को इतना काट देते हैं कि जीत किसी और की हो जाती है।
और फिर एंट्री होती है Messi की
Ballon d’Or की हर चर्चा आखिरकार उन तक पहुंच ही जाती है। हालांकि, इस बार सिर्फ पुरानी यादें उनकी दावेदारी की वजह नहीं हैं।

Messi ने 2025 में 28 रेगुलर-सीजन MLS मैचों में 29 गोल और 19 असिस्ट दिए, लीग का Golden Boot जीता और इस टूर्नामेंट में लगातार MVP अवॉर्ड जीतने वाले पहले खिलाड़ी बने। फिर उन्होंने Inter Miami को उनका पहला MLS Cup दिलाया, फाइनल में दो असिस्ट दिए और MLS Cup MVP चुने गए।
फिर आया World Cup। आठ गोल। चार असिस्ट। फाइनल में जगह। Silver Boot। टूर्नामेंट के दूसरे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में Silver Ball। और यह सब 39 साल की उम्र में।
Messi का मामला जूरी को शायद सबसे पेचीदा बहस में उलझा देता है। लीग की ताकत कितनी मायने रखती है?
अगर वही खिलाड़ी MLS में धाकड़ आंकड़े देता है, वहां का चैंपियनशिप जीतता है, और फिर World Cup में साबित करता है कि वो प्रदर्शन कमजोर विरोधियों की देन नहीं था, तो वोटर्स को क्लब अभियान को कितना कम करके आंकना चाहिए?
Messi Champions League का फुटबॉल नहीं खेल रहे थे। Kane, Mbappe, Khvicha, Rodri और Lamine यूरोपीय क्लब सीजन की कहीं ज्यादा कठिन चुनौतियों से गुजरे। इसका असर तो पड़ना ही चाहिए।
लेकिन फिर Messi फुटबॉल के सबसे बड़े फाइनल में पहुंचे और टूर्नामेंट के Golden Ball की रेस में Rodri के बाद दूसरे नंबर पर रहे। अगर सिर्फ MLS की वजह से उन्हें नजरअंदाज करेंगे, तो World Cup का उनका प्रदर्शन यह फैसला कमजोर कर देगा।
और अगर उन्हें Kane या Mbappe से ऊपर रखेंगे, तो हर हफ्ते मिलने वाली कड़ी टक्कर को नजरअंदाज करना नामुमकिन हो जाएगा।
39 साल की उम्र में भी, Messi ने किसी तरह खुद को इस बहस का हिस्सा बना लिया है कि Ballon d’Or आखिर किस चीज को अहमियत देता है।
एक वोट, महानता की सात परिभाषाएं
26 October को London में विजेता की घोषणा होगी।
कोई भी जीते, बहस तो छिड़ेगी ही। क्योंकि इस Ballon d’Or की सबसे दिलचस्प बात शायद यह नहीं होगी कि इसे कौन जीतता है। असल बात यह होगी कि यह नतीजा फुटबॉल के सबसे बड़े व्यक्तिगत पुरस्कार के बारे में क्या खुलासा करता है।

अगर Kane जीतते हैं, तो आंकड़ों की ताकत जीती।
अगर Mbappe जीतते हैं, तो आखिरकार व्यक्ति को टीम से अलग करके देखा गया।
अगर Lamine जीतते हैं, तो व्यक्तिगत प्रतिभा और सामूहिक सफलता ने एकदम सही संतुलन ढूंढ लिया।
अगर Rodri जीतते हैं, तो World Cup आज भी इस खेल को अपनी मर्जी से मोड़ देता है।
अगर Khvicha जीतते हैं, तो यूरोप अभी भी क्लब फुटबॉल का सबसे बड़ा मंच है।
और अगर Messi किसी तरह अपना नौवां अवॉर्ड जीत जाते हैं, तो इस खेल ने मान लिया होगा कि महानता उम्र, भूगोल और गिरावट के हर आम नियम को मात दे सकती है।
सात फुटबॉलर। सात बिल्कुल अलग-अलग सीजन। और एक Ballon d’Or।





